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	<title>गायत्री मंत्र - आवृत्ती इतिहास</title>
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	<subtitle>विकिवरील या पानाच्या आवृत्त्यांचा इतिहास</subtitle>
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		<title>ImportMaster: robot: Import pages using विशेष:आयात</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;robot: Import pages using &lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4&quot; title=&quot;विशेष:आयात&quot;&gt;विशेष:आयात&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नवीन पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{माहितीचौकट हिंदू धर्म}}[[File:Gayatri1.jpg|thumb|right|राजा रवी वर्मा द्वारा चित्रित [[गायत्री]] देवी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;गायत्री मंत्र&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; ही [[ऋग्वेद]]ातील एक ऋचा (ऋग्वेद ३.६२.१०) आहे. &amp;lt;ref&amp;gt;ऋग्वेद ३.६२.१०&amp;lt;/ref&amp;gt;. ही ऋचा मंत्राप्रामाणे उच्चारली जाते. ही ऋचा [[गायत्री छंद|गायत्री छंदात]] आहे. हा मंत्र सूर्याच्या उपासनेचा मंत्र आहे. गायत्री मंत्र हा चोवीस अक्षरांचा आहे. प्रत्येक अक्षराची एक देवता अशा या चोवीस देवता मानल्या आहेत. &amp;lt;ref&amp;gt;संदर्भ :  देवी. भाग. स्कंध १२-१) &amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मूळ &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;गायत्री मंत्र&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; येणेप्रमाणे : &amp;lt;br&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Cquote| तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धीयो यो नः प्रचोदयात्।}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;देवता-&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;१ अग्नि, २ वायु, ३ सूर्य, ४ आकाश, ५ यम, ६ वरुण, ७ बृहस्पति, ८ पर्जन्य, ९ इंद्र, १० गंधर्व, ११ पूषा, १२ मित्र, १३ त्वष्टा, १४ वसु, १५ मरुद्रण, १६ सोम, १७ अंगिरा, १८ विश्वेदेव, १९ अश्विनीकुमार, २० प्रजापति, २१ संपूर्ण देवता, २२ रुद्र, २३ ब्रह्मा आणि २४&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;गायत्री महामंत्र :&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; यजुर्वेदतील मंत्र &amp;#039;ॐ भूर्भूवः स्वः&amp;#039; मूळ गायत्री मंत्रास जोडून गायत्री महामंत्र पुढील प्रमाणे होतो: &amp;lt;br&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Cquote| ॐ भूर्भूवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धीयो यो नः प्रचोदयात्।}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओंकारला प्रणव असं म्हटलं जातं. तीन ओंकार जोडून &amp;#039;त्रिप्रणव गायत्री मंत्र&amp;#039; तयार होतो, ज्याला अतिशय शक्तिशाली मानल्या जाते. &amp;lt;br&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{Cquote| ॐ भूर्भूवः स्वः। ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धीयो यो नः प्रचोदयात् ॐ।}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;मूळ गायत्री मंत्राचा अर्थ&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; : विश्वाची उत्पत्ती ज्याच्यापासून होते; त्याचे आम्ही ध्यान करतो. तोच सच्चिदानंदरूप आहे. तो अज्ञानाचा नाश करतो. &amp;#039;&amp;#039;किंवा&amp;#039;&amp;#039; सविता देवाचे अत्यंत प्रिय किंवा सर्वश्रेष्ठ असे तेज आहे, त्याचे ध्यान आम्ही करीत आहोत. तो आमच्या विचारांना प्रेरणा देवो.&amp;lt;ref&amp;gt;{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=https://vishwakosh.marathi.gov.in/21649/|website=vishwakosh.marathi.gov.in|title=गायत्री (मंत्र):|accessdate= ९ मार्च २०२१}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गायत्री मंत्रात परब्रह्माचे म्हणजे सत्याचे स्मरण करताना आपल्या डोळ्यांंना दिसणारा सूर्यच समोर आणायचा असतो. &amp;#039;तो सविता आमच्या सर्वांच्या बुद्धीला प्रेरणा देवो&amp;#039; अशी प्रार्थना यामध्ये करायची असते.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==गायत्री देवीसंबंधी पौराणिक कथा==&lt;br /&gt;
[[गायत्री देवी|देवी गायत्रीची]] तीन रूपे मानली जातात.सकाळी ती रक्तवर्णी अक्षमाला-कमंडलुधारिणी ब्राह्मी असते. मध्याह्नी ती शङ्ख, चक्र, गदा धारणकारिणी वैष्णवी असते व संध्याकाळी ती वृषभारूढा व शूळ, पाश, नर-कपाल धारिणी वृद्ध शिवानी असते. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शब्द-कल्पद्रुमानुसार एकदा ब्रह्मापत्नी [[सावित्री]]स यज्ञस्थळी प्रवेश नाकारण्यात आला. क्रुद्ध ब्रह्मदेवाने दुसऱ्या स्त्रीसोबत विवाह करून यज्ञ समाप्त करण्याची इच्छा धरिली. त्याच्या इच्छेनुसार वधू शोधन करताना [[इंद्र|इंद्रास]] एका गवळ्याची पोर मिळाली. विष्णूच्या सल्ल्यानुसार या मुलीशी ब्रह्मदेवाने गांधर्वविवाह केला. ही मुलगीच [[गायत्री देवी|गायत्री]] होय.&amp;lt;ref&amp;gt;पौराणिका (विश्वकोष हिन्दुधर्म), प्रथम खंड, फार्मा केएलएम प्राइव्हेट लिमिटेड, कलकत्ता, २००१&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गायत्रीच्या ध्यानानुसार ती सूर्यमंडलात मध्यस्थानी असून [[ब्रह्मा]], [[विष्णू]] वा [[शिव]]रूपिणी आहे. आचार्याकडून संथा घेतलेल्या व्यक्तीने गायत्रीचा मंत्रजप करणे अपेक्षित असते. गायत्रीची स्तुती छांदोग्य उपनिषद व बृहदारण्यक उपनिषद या वैदिक ग्रंथांत केली आहे. गायत्री मंत्राच्या आधाराने काही देवतांच्या इतरही गायत्री रचण्यात आल्या आहेत.&amp;lt;ref&amp;gt;{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=https://www.jagran.com/spiritual/religion-know-about-some-powerful-gayatri-mantra-18990596.html|संकेतस्थळ=jagran.com|title=हरेक का होता है अलग मंत्र जानें 7 प्रमुख देव और उनके शक्‍तिशाली गायत्री मंत्र|भाषा=हिंदी|accessdate=९ मार्च २०२१}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इतरही देवतांच्या गायत्री:- श्रीगणेश गायत्री ,श्रीविष्णू गायत्री ,श्रीशिव गायत्री ,श्रीमहालक्ष्मी गायत्री.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*श्रीगणेश गायत्री: एकदन्ताय विद्महे। वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ति: प्रचोदयात्॥&lt;br /&gt;
*श्रीविष्णू गायत्री: ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णू: प्रचोदयात्॥&lt;br /&gt;
*श्रीशिव गायत्री: ॐ तत्पुरूषाय विद्महे। महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्॥&lt;br /&gt;
*श्रीमहालक्ष्मी गायत्री: ॐ महालक्ष्मैच विद्महे। विष्णूपत्नैच धीमहि। तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात्॥&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==हे सुद्धा पहा==&lt;br /&gt;
* [[गायत्री देवी]]&lt;br /&gt;
* [[गायत्री छंद]]&lt;br /&gt;
* [[विश्वामित्र]]&lt;br /&gt;
* [[गायत्री सहस्रनाम]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[वर्ग:हिंदू दैवते]]&lt;br /&gt;
[[वर्ग:हिंदू धर्म उपासना पद्धती]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाह्य दुवे==&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>ImportMaster</name></author>
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