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	<title>गुर्जर-प्रतिहार - आवृत्ती इतिहास</title>
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		<title>ImportMaster: robot: Import pages using विशेष:आयात</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;robot: Import pages using &lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4&quot; title=&quot;विशेष:आयात&quot;&gt;विशेष:आयात&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नवीन पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{हा लेख|गुर्जर हा राजवंश जमात|गुर्जर (निःसंदिग्धीकरण)}}&lt;br /&gt;
{{माहितीचौकट ऐतिहासिक साम्राज्ये&lt;br /&gt;
| नाव = गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
| ध्वज = &lt;br /&gt;
| ध्वजरुंदी =&lt;br /&gt;
| नकाशा = Indian Kanauj triangle map.svg&lt;br /&gt;
| नकाशारुंदी = 250| सुरुवात = इ.स. ७३०&lt;br /&gt;
| शेवट = इ.स. १०१९&lt;br /&gt;
| राजधानी = [[कनौज]]&lt;br /&gt;
| राजे = इ.स. ७३० ते इ.स. ७५६: नागभट्ट&amp;lt;br /&amp;gt;इ.स. ७७८ ते इ.स. ८०५: वत्सराज&amp;lt;br /&amp;gt;इ.स. ८०५ ते इ.स. ८३३: नागभट्ट दुसरा&amp;lt;br /&amp;gt;इ.स. ८३६ ते इ.स. ८८५: मिहीर भोज&amp;lt;br /&amp;gt;इ.स. ८८५ ते इ.स. ९१०: महेंद्रपाल&lt;br /&gt;
| भाषा = [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफळ = १८,००,००० चौ. कि.मी.&lt;br /&gt;
|लोकसंख्या = &lt;br /&gt;
|चलने = &lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;{{लेखनाव}}&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; ([[इ.स. ७३०]] ते [[इ.स. १०१९]]) हा [[भारत|भारतामध्ये]] असलेला गुर्जरदेसा प्रभावी असा एक राजवंश होता. [[कनौज]] ही प्रतिहार साम्राज्याची राजधानी होती.&amp;lt;ref&amp;gt;{{स्रोत पुस्तक&lt;br /&gt;
| लेखक =कल्के हेरमन&lt;br /&gt;
| सहलेखक =रॉदरमंड डाइटमॅंड&lt;br /&gt;
| title = अ हिस्ट्री ऑफ इंडिया&lt;br /&gt;
| दुवा = http://books.google.co.in/books?id=V73N8js5ZgAC&amp;amp;pg=PA163&amp;amp;dq=gurjara+pratihara&amp;amp;ei=hpIPS_fhOqDAzQT85pXrDA#v=onepage&amp;amp;q=gurjara%20pratihara%20kanauj&amp;amp;f=false &lt;br /&gt;
| भाषा = इंग्रजी&lt;br /&gt;
| प्रकाशक =रूटलेग&lt;br /&gt;
| वर्ष =इ.स. २००४&lt;br /&gt;
| आयएसबीएन =0-415-32920-5&lt;br /&gt;
| आवृत्ती =४ थी&lt;br /&gt;
| पृष्ठे =४३२&lt;br /&gt;
| अ‍ॅक्सेसदिनांक =२१ डिसेंबर, २०११&lt;br /&gt;
}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;ref&amp;gt;{{स्रोत पुस्तक&lt;br /&gt;
| लेखक =मुजुमदार रमेशचंद्र&lt;br /&gt;
| सहलेखक =&lt;br /&gt;
| title = द हिस्ट्री ॲंड कल्चर ऑफ द इंडियन पीपल:द क्लासिकल एज&lt;br /&gt;
| दुवा = http://books.google.co.in/books?id=8QhuAAAAMAAJ&amp;amp;q=gurjara+pratihara&amp;amp;dq=gurjara+pratihara&amp;amp;ei=hpIPS_fhOqDAzQT85pXrDA&lt;br /&gt;
| भाषा = इंग्रजी&lt;br /&gt;
| प्रकाशक =जी ॲलन ॲंड अलविन&lt;br /&gt;
| वर्ष =इ.स. १९५४&lt;br /&gt;
| आयएसबीएन =&lt;br /&gt;
| आवृत्ती =&lt;br /&gt;
| पृष्ठे =&lt;br /&gt;
| अ‍ॅक्सेसदिनांक =२१ डिसेंबर, २०११&lt;br /&gt;
}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;ref&amp;gt;{{स्रोत पुस्तक&lt;br /&gt;
| लेखक =चोप्रा प्राणनाथ&lt;br /&gt;
| सहलेखक =&lt;br /&gt;
| title = अ कॉंम्रेहेन्सिव्ह हिस्ट्री ऑफ एंशंट इंडिया&lt;br /&gt;
| दुवा = http://books.google.co.in/books?id=gE7udqBkACwC&amp;amp;pg=PA196&amp;amp;dq=gurjara+pratihara&amp;amp;lr=&amp;amp;ei=A5MPS5nlJ5TszASI-oiTDQ#v=onepage&amp;amp;q=gurjara%20pratihara&amp;amp;f=false&lt;br /&gt;
| भाषा = इंग्रजी&lt;br /&gt;
| प्रकाशक =स्टर्लिंग पब्लिशर्स&lt;br /&gt;
| वर्ष =इ.स. २००३&lt;br /&gt;
| आयएसबीएन =81-207-2503-4&lt;br /&gt;
| आवृत्ती =&lt;br /&gt;
| पृष्ठे =१९६&lt;br /&gt;
| अ‍ॅक्सेसदिनांक =२१ डिसेंबर, २०११&lt;br /&gt;
}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== स्थापना ==&lt;br /&gt;
हरिश्चंद्राने [[राजस्थान|राजस्थानातील]] [[जोधपूर]] येथे गुर्जरवंशाची स्थापना केली. त्यानंतर राजस्थानात त्यांच्या अनेक शाखा स्थापन झाल्या. त्यापैकी पहिल्या नागभट्टाने [[इ.स. ७३०]] मध्ये [[मध्यप्रदेश|मध्यप्रदेशातील]] [[अवंती]] येथे प्रतिहार घराण्याचे स्वतंत्र राज्य स्थापन केले.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राज्यकर्ते ==&lt;br /&gt;
=== नागभट्ट (इ.स. ७३० ते इ.स. ७५६) ===&lt;br /&gt;
{{मुख्यलेख|नागभट्ट पहिला}}&lt;br /&gt;
प्रतिहारांचे स्वतंत्र राज्य स्थापन करणारा नागभट्ट हा सुरुवातीला [[राष्ट्रकूट|राष्ट्रकुटांचा]] मांडलिक होता. याने [[जोधपूर]] व नंदपूरच्या प्रतिहारांचा प्रदेश जिंकून घेतला. राष्ट्रकूट राजा [[दंतिदुर्ग]] याच्याशीही त्याने प्रतिकार केला होता. [[गुर्जरदेसा]], [[गुजरात]], व [[माळवा|माळव्याचा]] बराच भाग याने आपल्या राज्याला जोडला होता. नागभट्टाने [[इ.स. ७३०]] ते [[इ.स. ७५६]] पर्यंत राज्य केले. त्यानंतर कक्कूक, देवराज व वत्सराज हे गादीवर आले.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== वत्सराज (इ.स. ७७८ ते इ.स. ८०५) ===&lt;br /&gt;
नागभट्टानंतर वत्सराज हा {{लेखनाव}} घराण्यातील कर्तबगार राजा होऊन गेला. त्याने [[इ.स. ७७८]] ते [[इ.स. ८०५]] पर्यंत राज्य केले. वत्सराजाने गुर्जरदेसा हा प्रांत जिंकून घेतला होता. राष्ट्रकूट राजा ध्रुव याने वत्सराजावर आक्रमण करून त्याचा भीषण पराभव केला होता.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== नागभट्ट दुसरा (इ.स. ८०५ ते इ.स. ८३३) ===&lt;br /&gt;
वत्सराजानंतर त्याचा मुलगा नागभट्ट दुसरा हा सत्ताधीश झाला. त्याने [[इ.स. ८०५]] ते [[इ.स. ८३३]] पर्यंत राज्य केले. याने चक्रायुधाचा पराभव करून [[कनौज]] जिंकून घेतले होते.&lt;br /&gt;
=== मिहीर भोज (इ.स. ८३६ ते इ.स. ८८५) ===&lt;br /&gt;
मिहीर भोज हा प्रतिहार घराण्यातील सर्वश्रेष्ठ सम्राट होता. कारकिर्दीच्या सुरुवातीला त्याला अनेक शत्रूंशी सामना करावा लागला. [[बंगाल]]मधल्या देवपालाने त्याचा पराभव केला. राष्ट्रकूट राजा दुसऱ्या ध्रुवानेही त्याच्यावर स्वारी केली. [[कलचुरी वंश|कलचुरी]] राजा कोक्कलाकडूनही त्याला पराभव स्विकारावा लागला. या आक्रमणांनी खचून न जाता त्याने परत बंगालच्या देवपालावर आक्रमण करून त्याला पराभूत केले व राष्ट्रकूटाच्या कृष्णाचाही पराभव केला आणि [[माळवा]], [[गोरखपूर]], [[सौराष्ट्र]] व [[बुंदेलखंड|बुंदेलखंडावर]] आपले प्रभुत्व प्रस्थापित केले. मिहीर भोजाने [[कनौज]] ही प्रतिहार साम्राज्याची राजधानी केली.&lt;br /&gt;
=== महेंद्रपाल (इ.स. ८८५ ते इ.स. ९१०) ===&lt;br /&gt;
महेंद्रपाल हा मिहीरभोजाचा मुलगा होता. त्याने [[इ.स. ८८५]] ते [[इ.स. ९१०]] पर्यंत राज्य केले. याने सुरुवातीला [[मगध]] व उत्तर [[बंगाल]]वर प्रभुत्व प्रप्त केले, सौराष्ट्राचाही भाग आपल्या ताब्यात घेतला पण नंतर [[काश्‍मीर|काश्मीर]]च्या राजाने आक्रमण करून महेंद्रपालाचे काही प्रदेश जिंकून घेतले. &lt;br /&gt;
=== महिपाल (इ.स. ९१२ ते इ.स. ९४४) ===&lt;br /&gt;
महिपालाच्या कारकिर्दीत राष्ट्रकूट राजा तिसरा इंद्र याने प्रतिहार साम्राज्यावर आक्रमण करून बराच मोठा प्रदेश जिंकून घेतला आणि राजधानी [[कनौज]]चाही विध्वंस केला.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== इतर राजे ===&lt;br /&gt;
महिपालानंतर महेंद्रपाल दुसरा, देवपाल, विनायकपाल दुसरा, महिपाल दुसरा, विजयपाल, राज्यपाल, त्रिलोचनपाल व यशपाल हे गुर्जरवंशी राजे वारसदार बनले. &lt;br /&gt;
== शेवट ==&lt;br /&gt;
राष्ट्रकूट राजा तिसरा इंद्र याने प्रतिहार साम्राज्यावर केलेल्या आक्रमणामुळे गुर्जरांची सत्ता दुर्बल झाली. याचा फायदा घेऊन बंगालमधल्या पालांनीही सोम नदीपर्यंतचा मुलुख आपल्या ताब्यात घेतला. महिपालानंतर इतर गुर्जर आक्रमणे करून प्रतिहारांचे राज्य जिंकून घेतले. [[चंदेल्ल घराणे|चंदेल्ल]] वंशीयांनी कनौज जिंकले. परमार, चालुक्य, [[गुहिलोत]] या गुर्जर घराण्यांनी प्रतिहार साम्राज्य वाटून घेतले. त्याचवेळी [[इ.स. १०१९]] मध्ये [[गझनीचा महमूद|गझनीच्या महमूदाने]] त्रिलोचनपालाला पूर्ण पराभूत केले व गुर्जर सत्ता पूर्णपणे नामशेष झाली.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== हे सुद्धा पहा ==&lt;br /&gt;
*[[भारतातील सर्वात मोठ्या साम्राज्यांची यादी]]&lt;br /&gt;
*[[मौर्य साम्राज्य]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संदर्भ व नोंदी ==&lt;br /&gt;
{{संदर्भयादी}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{भारतीय राजवंश}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[वर्ग:भारतीय राजवंश]]&lt;br /&gt;
[[वर्ग:भारतीय साम्राज्ये]]&lt;br /&gt;
[[वर्ग:गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>ImportMaster</name></author>
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