<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="mr">
	<id>https://mr.bharatpedia.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0</id>
	<title>समरांगणसूत्रधार - आवृत्ती इतिहास</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://mr.bharatpedia.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://mr.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0&amp;action=history"/>
	<updated>2026-08-30T00:14:18Z</updated>
	<subtitle>विकिवरील या पानाच्या आवृत्त्यांचा इतिहास</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.43.6</generator>
	<entry>
		<id>https://mr.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0&amp;diff=7455&amp;oldid=prev</id>
		<title>ImportMaster: robot: Import pages using विशेष:आयात</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://mr.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0&amp;diff=7455&amp;oldid=prev"/>
		<updated>2022-05-01T18:42:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;robot: Import pages using &lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4&quot; title=&quot;विशेष:आयात&quot;&gt;विशेष:आयात&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नवीन पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;समरांगणसूत्रधार हा प्राचीन ग्रंथ आहे. हा [[संस्कृत]] भाषेत लिहिला गेला आहे. भारतातील धार येथील परमार [[राजा भोज]] याने हा ग्रंथ रचला. या ग्रंथात ८३ अध्याय आहेत. प्राचीन भारतीय विमानशास्त्र व त्याचे वर्णन यासाठी हा ग्रंथ प्रसिद्ध आहे. मात्र या शिवाय यामध्ये &lt;br /&gt;
* नगर रचना &lt;br /&gt;
* गाव कसे असावे याची आखणी व आराखडे &lt;br /&gt;
* घरे बांधण्याच्या पद्धती&lt;br /&gt;
* मंदिरे बांधण्याच्या पद्धती&lt;br /&gt;
या विषयी व्यवस्थित माहिती आढळते.&lt;br /&gt;
हा ग्रंथ प्राचीन भारतीय संस्कृती वैज्ञानिक दृष्ट्या पुढारलेली होती हे सिद्ध करतो.&lt;br /&gt;
==पुनरावृत्ती==&lt;br /&gt;
[[बडोदा संस्थान]]च्या ग्रंथालयाच्या पुढाकाराने श्री गणपतिशास्त्री यांनी हस्तलिखिते मिळवून या ग्रंथाची शुद्ध आवृत्ती लिहिली. ही आवृत्ती दोन खंडामध्ये छापील स्वरूपात इ.स. १९२४ मध्ये प्रसिद्ध केली.&lt;br /&gt;
==स्वरूप==&lt;br /&gt;
या ग्रंथात अनेक वैज्ञानिक यंत्राचे वर्णन आहे.&lt;br /&gt;
*शय्याप्रसर्पण यन्त्र&lt;br /&gt;
*नाडीप्रबोधन यन्त्र - थालीमध्ये उभी बाहुली क्रमाने तीनशे दात्यांमधून फिरते आणि दर नाडीला इशारा देते. (घडयाळासारखा escape mechanism वापरून तीनशे दात्यांचे चक्र फिरते आणि दर नाडीला आवाज करते असा ह्याचा अर्थ असावा असे वाटते. नाडी = अर्धा मुहूर्त = २४ मिनिटे.)&lt;br /&gt;
*गोलभ्रमण यन्त्र - पाऱ्यावर (सूति = quicksilver, मोनिअर-विल्यम्स) आधारित असा गोल सूर्य इत्यादींचे भ्रमण आणि ग्रहांची गति दर्शवीत अहोरात्र फिरत राहतो.&lt;br /&gt;
*दूरगमन यन्त्र - गज  इत्यादी अथवा रथारोही रूपातील पुरुष (बाहुली) नाडीमधून (tube) तिच्या अन्तापर्यंत एक योजन प्रवास करतो.&lt;br /&gt;
*दीपतैल यन्त्र - दीपातील बाहुली तालावर नृत्यामधून प्रदक्षिणा करत करत दिव्यामध्ये थोडेथोडे तेल घालत जाते.&lt;br /&gt;
===विमानविद्या===&lt;br /&gt;
यंत्रविधान या भागातील खालील श्लोक विमान विषयक आहेत.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    लघुदारुमयं महाविहङ्गं दृढसुश्लिष्टतनुं विधाय तस्य&lt;br /&gt;
    उदरे रसयन्त्रमादधीत ज्वलनाधारमधोऽस्य चातिपूर्णम्॥ ९५&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    तत्रारूढ: पूरुषस्तस्य पक्षद्वन्द्वोच्चालप्रोज्झितेनानिलेन&lt;br /&gt;
    सुप्तस्वान्त: पारदस्यास्य शक्त्या चित्रं कुर्वन्नम्बरे याति दूरम्॥ ९६&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    इत्थमेव सुरमन्दिरतुल्यं सञ्चलत्यलघु दारुविमानम्&lt;br /&gt;
    आदधीत विधिना चतुरोऽन्तस्तस्य पारदभृतान् दृढकुम्भान्॥ ९७&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    अयःकपालाहितमन्दवह्निप्रतप्ततत्कुम्भभुवा गुणेन&lt;br /&gt;
    व्योम्नो झगित्याभरणत्वमेति सन्तप्तगर्जद्ररसरागशक्त्या॥ ९८&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*सर्वसाधारण भाषांतर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==समरांगणसूत्रधार ८३ अध्यायांची नावे==&lt;br /&gt;
*	    समराङ्गणसूत्रधारा नाम प्रथमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    विश्वकर्मणः पुत्रसंवादो नाम द्वितीयोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    प्रश्नो नाम तृतीयोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    महदादिसर्गश्चतुर्थोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    भुवनकोशः पञ्चमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    सहदेवाधिकारः षष्ठोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    वर्णाश्रमप्रविभागः सप्तमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    भूमिपरीक्षा नामाष्टमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    हस्तलक्षणं नाम नवमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    पुरनिवेशो दशमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    वास्तुत्रयविभागो नामैकादशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    नाड्यादिसिरादिविकल्पो नाम द्वादशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    मर्मवेधस्त्रयोदशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    पुरुषाङ्गदेवतानिघण्ट्वादिनिर्णयश्चतुर्दशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    राजनिवेशो नाम पञ्चदशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    वनप्रवेशो नाम षोडशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    इन्द्र ध्वजनिरूपणं नाम सप्तदशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    नगरादिसंज्ञा नामाष्टादशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    चतुःशालविधानं नामैकोनविंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    निम्नोच्चादिफलानि नाम विंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    द्वासप्ततित्रिशाललक्षणं नामैकविंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    द्विशालगृहलक्षणं नाम द्वाविंशोध्यायः&lt;br /&gt;
*	    एकशालालक्षणफलादि नाम त्रयोविंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    द्वारपीठभित्तिमानादिकं नाम चतुर्विंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    समस्तगृहाणां सङ्ख्याकथनं नाम पञ्चविंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    आयादिनिर्णयो नाम षड्विंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    सभाष्टकं नाम सप्तविंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    गृहद्र व्यप्रमाणानि नामाष्टाविंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    शयनासनलक्षणं नाम एकोनत्रिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    राजगृहं नाम त्रिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    यन्त्रविधानं नामैकत्रिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    गजशाला नाम द्वात्रिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    अथाश्वशाला नाम त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    अथाप्रयोज्यप्रयोज्यं नाम चतुस्त्रिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    शिलान्यासविधिर्नाम पञ्चत्रिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    बलिदानविधिर्नाम षट्त्रिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    कीलकसूत्रपातो नाम सप्तत्रिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    वास्तुसंस्थानमातृका नामाष्टात्रिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    द्वारगुणदोषो नामैकोनचत्वारिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    पीठमानं नाम चत्वारिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    चयविधिर्नामैकचत्वारिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    शान्तिकर्मविधिर्नाम द्विचत्वारिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    द्वारभङ्गफलं नाम त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    स्थपतिलक्षणं नाम चतुश्चत्वारिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    अष्टङ्गलक्षणं नाम पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    तोरणभङ्गादिशान्तिको नाम षट्चत्वारिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    वेदीलक्षणं नाम सप्तचत्वारिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    गृहदोषनिरूपणं नामाष्टचत्वारिंशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    रुचकादिप्रासादलक्षणं नामैकोनपञ्चाशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    प्रासादशुभाशुभलक्षणं नाम पञ्चाशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    अथायतननिवेशो नामैकपञ्चाशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    प्रासादजातिर्नाम द्विपञ्चाशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    जघन्यवास्तुद्वारं नाम त्रिपञ्चाशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    प्रासादद्वारमानादि नाम चतुष्पञ्चाशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    मेर्वादिषोडशप्रासादादिलक्षणं नाम पञ्चपञ्चाशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    रुचकादिचतुष्षष्टिप्रासादकः षट्पञ्चाशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    मेर्वादिविंशिका नाम सप्तपञ्चाशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    प्रासादस्तवनं नाम अष्टपञ्चाशोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    विमानादिचतुष्षष्टिप्रासादलक्षणं नामैकोनषष्टितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    श्रीकूटादिषट्त्रिंशत्प्रासादलक्षणं नाम षष्टितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    पीठपञ्चकलक्षणं नामैकषष्टितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    द्रा विडप्रासादलक्षणं नाम द्विषष्टितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    मेर्वादिविंशिकानागरप्रासादलक्षणं नाम त्रिषष्टितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    दिग्भद्रा दिप्रासादलक्षणं नाम चतुष्षष्टितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    भूमिजप्रासादलक्षणं नाम पञ्चषष्टितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    मण्डपलक्षणं नाम षट्षष्टितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    सप्तविंशतिमण्डपलक्षणं नाम सप्तषष्टितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    जगत्यङ्गसमुदायाधिकारो नामाष्टषष्टितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    जगतीलक्षणं नामैकोनसप्ततितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    लिङ्गपीठप्रतिमालक्षणं नाम सप्ततितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    चित्रोद्देशो नामैकसप्ततितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    भूमिबन्धो नाम द्विसप्ततितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    लेप्यकर्मादिकं नाम त्रिसप्ततितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    अथाण्डकप्रमाणं नाम चतुःसप्ततितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    मानोत्पत्तिर्नाम पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    प्रतिमालक्षणं नाम षट्सप्ततितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    देवादिरूपप्रहरणसंयोगलक्षणं नाम सप्तसप्ततितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    दोषगुणनिरूपणं नामाष्टसप्ततितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    ऋज्वागतादिस्थानलक्षणं नामैकोनाशीतितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    वैष्णवादिस्थानकलक्षणं नामाशीतितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    पञ्चपुरुषस्त्रीलक्षणं नामैकाशीतितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    रसदृष्टिलक्षणं नाम द्व्यशीतितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
*	    पताकादिचतुष्षष्टिहस्तलक्षणं नाम त्र्यशीतितमोऽध्यायः&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==हे सुद्धा पाहा==&lt;br /&gt;
* [[प्राचीन भारतीय विज्ञान]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[वर्ग : भारतीय ग्रंथ]]&lt;br /&gt;
[[वर्ग : भारतीय विज्ञान]]&lt;br /&gt;
[[वर्ग:संस्कृत साहित्य]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>ImportMaster</name></author>
	</entry>
</feed>