राग काफी
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राग काफी हा भारतीय शास्त्रीय संगीतातील एक राग आहे.
थाट[संपादन | स्रोत संपादित करा]
काफी
स्वर[संपादन | स्रोत संपादित करा]
गंधार (ग) आणि निषाद (नि) कोमल असून उर्वरित स्वर शुद्ध आहेत.
आरोह[संपादन | स्रोत संपादित करा]
सारेग॒ मप धनि॒सां
अवरोह[संपादन | स्रोत संपादित करा]
सांनि॒धप, मग॒रे, सा
वादी आणि संवादी[संपादन | स्रोत संपादित करा]
वादी स्वर पंचम (प) , संवादी स्वर रिषभ
पकड[संपादन | स्रोत संपादित करा]
सा, रे रे, ग॒ मम, प
गायन समय[संपादन | स्रोत संपादित करा]
संध्याकाळ तसेच रात्रीचा पहिला प्रहर
गायन ऋतू[संपादन | स्रोत संपादित करा]
सर्व ऋतू
संदर्भ[संपादन | स्रोत संपादित करा]
१. राग-बोध (प्रथम भाग). बा. र. देवधर.
उदाहरण[संपादन | स्रोत संपादित करा]
घर आंगण न सुहावै, पिया बिन मोहि न भावै॥
दीपक जोय कहा करूं सजनी, पिय परदेस रहावै।
सूनी सेज जहर ज्यूं लागे, सिसक-सिसक जिय जावै॥
नैण निंदरा नहीं आवै॥
कदकी उभी मैं मग जोऊं, निस-दिन बिरह सतावै।
कहा कहूं कछु कहत न आवै, हिवड़ो अति उकलावै॥
हरि कब दरस दिखावै॥
ऐसो है कोई परम सनेही, तुरत सनेसो लावै।
वा बिरियां कद होसी मुझको, हरि हंस कंठ लगावै॥
मीरा मिलि होरी गावै॥